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Pregnancy In Hindi – प्रेगनेंसी क्या और कैसे होती है?

एक महिला के लिए उसके जीवन में गर्भधारण या गर्भावस्था बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। यही वह अवस्था होती है जब एक महिला एक नए जीवन को जन्म देती है। आज हम आपको बताएंगे कि गर्भावस्था क्या होती है और गर्भधारण कैसे किया जा सकता है? साथ ही माह दर माह प्रग्नेंसी के लक्षण (pregnancy symptoms in Hindi) कैसे होते हैं और आप क्या क्या सबधानियाँ (Pregnancy precautions in Hindi) बरत सकते हैं। आइये जानते हैं Pregnancy in Hindi क्या होती है?

प्रेगनेंसी क्या होती है? What is Pregnancy in Hindi

Pregnancy in Hindi: प्रेगनेंसी महिला के शरीर के भीतर विकासशील भ्रूण बनने की एक प्रक्रिया होती है। इस स्थिति को ओवर-द-काउंटर मूत्र परीक्षण द्वारा पहचाना जा सकता, यदि आपके परीक्षा का परिणाम सकारात्मक आता है इसका मतलब होता हिअ की आप प्रेग्ननेंट हैं। इसके अलावा ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, भ्रूण के दिल की धड़कन का पता लगाकर या एक्स-रे के माध्यम से भी प्रेगनेंसी की पुष्टि की जा सकती है। प्रेगनेंसी लगभग नौ महीने तक चलती है, और महिला की अंतिम मासिक धर्म (एलएमपी) की तारीख से इसे मापा जाता है। पारंपरिक रूप से प्रेगनेंसी को तीन trimesters (ट्राइमिस्टर) में विभाजित किया गया है, और यह प्रत्येक लगभग तीन महीने लंबा होता है।

प्रेगनेंसी कैसे होती है? How Do People Get Pregnant in Hindi

गर्भावस्था (Pregnancy in Hindi) वास्तव में एक जटिल प्रक्रिया होती है जिसमें कई चरण होते हैं। इसकी शुरुआत शुक्राणु कोशिकाओं और एक अंडे से होती है।

दरअसल शुक्राणु या स्पर्म सूक्ष्म कोशिकाएं होती हैं जो पुरुष के अंडकोष में बनती हैं। वीर्य (सीमेन) बनाने के लिए स्पर्म अन्य तरल पदार्थों के साथ मिलते हैं, जो वीर्यस्खलन (एजेकुलशन) के दौरान लिंग से बाहर आता है। हर बार जब एक पुरुष वीर्यस्खलन (एजेकुलेट) होते हैं तो लाखों की संख्या में स्पर्म बाहर निकलते हैं – लेकिन प्रेग्नेंट होने के लिए अंडे के साथ केवल 1 स्पर्म के मिलने की ही आवश्यकता होती है।

अंडे महिला के अंडाशय या ओवरी में रहते हैं। प्रत्येक माह, महिला के मेंस्ट्रुअल साइकिल को नियंत्रित करने वाले हार्मोन कुछ अण्डों को परिपक्व करते हैं। जब अंडा परिपक्व हो जाता है, तब इसका मतलब है होता कि यह स्पर्म द्वारा निषेचित होने के लिए तैयार है। ये हार्मोन महिला के गर्भाशय या यूटेरस के अस्तर को मोटा और स्पंजी बनाते हैं, जिससे एक महिला का शरीर प्रेगनेंसी के लिए तैयार होता है।

महिला के मासिक धर्म चक्र के करीबन 12वें से 14वें दिन के करीब, एक परिपक्व अंडा ओवरी को छोड़ देता है – इस प्रकिया को ओव्यूलेशन कहा जाता है। ओवरी को छोड़ने के बाद यह अण्डा महिला के गर्भाशय की ओर फैलोपियन ट्यूब के माध्यम से यात्रा करता है।

ओवुलेशन की प्रक्रिया के बाद अंडा लगभग 12-24 घंटों के लिए फेलोपियन ट्यूब से से आगे बढ़ता है, और यह देखता है कि यदि कोई स्पर्म आसपास है या नहीं। ओबुलेशन की प्रक्रिया के दौरान यदि महिला सम्भोग करती है और योनि में सीमेन चला जाता है, तो स्पर्म गर्भाशय ग्रीवा और गर्भाशय के माध्यम से और फैलोपियन ट्यूब में अण्डे की तलाश में आगे बढ़ता है। एक स्पर्म करीबन 6 दिन तक जीवित रहता है और इस दौरान यह अण्डे की तलाश करता रहता है।

जब एक स्पर्म अंडे के साथ मिलता है, तो इसे निषेचन (फर्टिलाइजेशन) कहा जाता है। परन्तु निषेचन तुरंत नहीं होता है। चूंकि स्पर्म महिला के गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब में सेक्स के बाद 6 दिनों तक लटका रह सकता हैं, इसलिए सेक्स और निषेचन के बीच 6 दिन तक का समय हो सकता है।

यदि एक स्पर्म अंडे के साथ जुड़ जाता है, तो निषेचित अंडा गर्भाशय की ओर फैलोपियन ट्यूब से नीचे चला जाता है। और यह अधिक से अधिक कोशिकाओं में विभाजित होना शुरू कर देता है, और जैसे जैसे यह बढ़ता है, एक बॉल का निर्माण करने लगता है । यह कोशिकाओं की गेंद (जिसे ब्लास्टोसिस्ट कहा जाता है) निषेचन के लगभग 3-4 दिनों बाद गर्भाशय में पहुंच जाती है। जब यह कोशिकाओं की बॉल महिला के गर्भाशय के अस्तर से जुड़ जाती है, तब आधिकारिक रूप से प्रेगनेंसी शुरू होती है।

निषेचन के लगभग 6 दिन बाद प्रत्यारोपण (इम्प्लांटेशन) शुरू होता है, और इसे पूरा होने में लगभग 3-4 दिन लगते हैं। भ्रूण बॉल के अंदर की कोशिकाओं से विकसित होता है और नाल बॉल के बाहर की तरफ कोशिकाओं से विकसित होती है। औसतन, एक पूर्ण गर्भावस्था 40 सप्ताह तक रहती है।

क्या होता है जब स्पर्म अण्डे को निषेचित नहीं कर पाता?

जब एक निषेचित अण्डा गर्भाशय में प्रत्यारोपित होता है, तो यह प्रेगनेंसी हार्मोन को रिलीज करता है जो आपके गर्भाशय के अस्तर को बहने से रोकता है – इसीलिए प्रेगनेंसी (pregnancy in Hindi) के समय पीरियड्स नहीं आते हैं। परन्तु यदि अण्डा स्पर्म के साथ नहीं मिलता है, या एक निषेचित अंडा महिला के गर्भाशय में आरोपण नहीं करता है, तो आपके गर्भाशय की मोटी परत की आवश्यकता नहीं होती है और यह पीरियड्स के दौरान निकल जाता है। सभी निषेचित अंडों में से करीबन आधे तक स्वाभाविक रूप से गर्भाशय में प्रत्यारोपित नहीं होते हैं और वे महिला के पीरियड्स के दौरान शरीर से बाहर निकल जाते हैं।

और पढ़िए : Obulation Meaning in Hindi

प्रेगनेंसी के लक्षण क्या होते हैं? Pregnancy Symptoms in Hindi

यदि आपको ऐसा लगता है कि आप प्रेग्नेंट हैं तो इसके परीक्षण से पहले भी आपको कुछ संकेत और लक्षण दिखाई दे सकते हैं। जैसे ही आपके हार्मोन के स्तर में बदलाव होगा, ये लक्षण कुछ सप्ताह के बाद दिखाई देने लगेंगे। Pregnancy symptoms in hindi इस प्रकार है-

  • पीरियड्स का न होना
  • कभी कभी हल्की ब्लीडिंग होना
  • सामान्य से अधिक बार पेशाब करना
  • सरदर्द
  • वजन का बढ़ना
  • प्रेगनेंसी के कारण हाई प्रेशर
  • हृदय में जलन (हार्ट बर्न)
  • कब्ज की शिकायत
  • क्रैम्प्स (ऐंठन)
  • बैकपेन (कमरदर्द)
  • डिप्रेशन
  • एनीमिया
  • अनिद्रा की समस्या(Insomnia)
  • स्तन के आकार में परिवर्तन
  • सूजे हुए या कोमल स्तन
  • मुँहासे
  • उल्टियाँ होना
  • जी मिचलाना
  • डायरिया (दस्त की समस्या)
  • कूल्हे में दर्द
  • तनाव
  • पेट का फूलना

प्रेगनेंसी के चरण माह अनुसार – Month By Month Pregnancy in Hindi

Pregnancy in Hindi को तीन trimesters (तीन महीने की अवधि) में विभाजित किया गया है। यह विभाजन महिलाओं के उन लक्षणों का वर्णन करने में काफी सुविधाजनक होते हैं, जो महिला अनुभव करती है।

पहली तिमाही (0-12 सप्ताह)

पहली तिमाही (1 से 12वाँ सप्ताह) के दौरान भ्रूण तेजी से बढ़ता है। भ्रूण अपने मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और अंगों को विकसित करना शुरू कर देता है। इस दौरान बच्चे का दिल भी धड़कने लगता है। पहली तिमाही के दौरान, गर्भपात (मिसकैरिज) की संभावना अपेक्षाकृत अधिक होती है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ ओब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट (ACOG) के अनुसार, 10 में से 1 प्रेग्नेसी गर्भपात की वजह से समाप्त हो जाती है, और इनमें से लगभग 85 प्रतिशत गर्भपात पहली तिमाही में ही होते हैं।

तो यदि आप गर्भपात का कोई भी लक्षण महसूस करती हैं तो तुरंत अपने डॉक्टर की मदद लें।

दूसरी तिमाही (13 -27 सप्ताह)

प्रेगनेंसी की दूसरे तिमाही (13 से 27 सप्ताह) के दौरान, सबसे पहले आपका डॉक्टर संभवतः एनाटोमी स्केन अल्ट्रासाउंड (शरीर रचना स्कैन अल्ट्रासाउंड) करेगा।

यह परीक्षण किसी भी विकास संबंधी असामान्यताओं के लिए भ्रूण के शरीर की जाँच करता है। परीक्षण के परिणाम आपके बच्चे के लिंग को भी प्रकट कर सकते हैं, यदि आप बच्चे के जन्म से पहले पता लगाना चाहते हैं।

साथ ही इस तिमाही के दौरान महिला अपने गर्भाशय के अंदर अपने बच्चे का हिलना, लात मारना और मुक्का मारना महसूस कर सकती है।

23 सप्ताह के बाद, गर्भाशय में एक बच्चा “व्यवहार्य” माना जाता है, इसका मतलब है कि यह आपके गर्भ से बाहर रह सकता है। इस प्रकार के जल्दी पैदा होने वाले शिशुओं के साथ अक्सर गंभीर चिकित्सा मुद्दे होते हैं। बच्चे के स्वस्थ होने के संभावनाएं उतनी अधिक हो जाती हैं जितना वह महिला के गर्भ में रहता है। इसका मतलब यह है कि एक महिला जितने लम्बे समय तक प्रेग्नेंट रहेगी उसका बच्चा उतना ही अधिक स्वस्थ होगा।

तीसरी तिमाही (28-40 सप्ताह )

तीसरी तिमाही (सप्ताह 28 से 40) के दौरान, महिला के वजन में तेजी से बृद्धि होती है और इस दौरान वह अधिक थकान महसूस करने लगती है। यही वह समय होता है जब बच्चा अब रोशनी को महसूस करने लगता है और साथ-साथ वह अपनी आँखें खोलने और बंद करने लगता है। इसी समय उनकी हड्डियाँ भी बनने लगती हैं।

जैसे-जैसे लेबर का समय नज़दीक आता है, महिलाओं को उनके पेल्विक में असुविधा महसूस होने लगती है, और पैरों में सूजन आना प्रारम्भ हो जाती है। वे अनुबंध जो लेबर के लिए नेतृत्व नहीं करते हैं, जिन्हें ब्रेक्सटन-हिक्स संकुचन के रूप में जाना जाता है, बच्चे को जन्म देने से पहले हफ्तों में घटित हो सकते हैं।

प्रेगनेंसी के समय क्या साबधानियाँ बरतें – Pregnancy Precautions in Hindi

शराब और ड्रग्स से परहेज करने के अलावा, गर्भावस्था के दौरान क्या न करें, इसके लिए कोई ज्यादा कठिन नियम नहीं हैं। ज्यादातर समय में आप अपने पुराने जीवन के समान अपना समय और आदतें जारी रख सकते हैं। किन्तु क्योंकि आपके बढ़ते हुए बच्चे की सेहत और सुरक्षा जरूरी है, इसलिए यहां हमने कुछ साबधानियॉ बताई हैं, आप इनका पालन अवश्य करें –

  1. निषेध खाद्य पदार्थ: प्रेगनेंसी के दौरान अपने खाने पीने का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है अतः निचे दिये गए खाद्य पदार्थों का सेवन न करें-
  • कच्चा माँस और शेलफिश (कस्तूरा)
  • मुलायम माँस
  • मरकरी (पारा की अधिक मात्रा) वाली मछलियाँ
  • स्मोक्ड सीफ़ूड
  • कच्चे अण्डे
  • सॉफ्ट चीज़
  • अनपस्चुराईज़ेड डेयरी पदार्थ
  1. धूम्रपान और सेकंड हैंड स्मोकिंग (सिगग्रेट के धुंए में साँस लेना) से बचें
  2. शराब का सेवन न करे
  3. अत्यधिक कैफीन का सेवन न करे (2 से ज्यादा कप नहीं)
  4. ड्रग्स का प्रयोग न करें
  5. हॉट टब में स्नान न करें
  6. कुछ हर्ब्स और दवाइयाँ जो बच्चे को नुकसान पहुँचाए

गर्भवती (Pregnancy in Hindi) होने के कुछ तरीके होते हैं। यदि आपको आपकी प्रजनन क्षमता और ओवुलेशन पैटर्न का पता हो तो आप अपने प्रेग्नेंट होने की संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं। आपका डॉक्टर आपको स्वस्थ गर्भावस्था की योजना बनाने में मदद कर सकता है।

और पढ़िए : गर्भावस्था के लक्षण – Symptoms of Pregnancy in Hindi

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