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Cataract Meaning in Hindi – जानिए मोतियाबिंद के बारे में

हमारी बढ़ती उम्र हमे बहुत सी बीमारियों का शिकार बना सकती है, बढ़ती उम्र के साथ जोड़ों की समस्या, शरीर में झुकाव आ जाना, कम दिखाई देना जैसे बहुत सी समस्याएं हो सकती हैं मोतियाबिंद (Cataract meaning in Hindi) उन्ही में से एक है। अगर आपकी उम्र 60 साल या उससे अधिक हो चुकी है और आप सही से नहीं देख पाते हैं या सबकुछ धुंधला दिखाई देता है तो आपको मोतियाबिंद हो सकता है। उम्रदराज़ लोगों में यह समस्या बहुत ही आम होती है। परन्तु इसका इलाज आप आँख के डॉक्टर से करा सकते हैं। यहाँ इस लेख में हम बताएंगे कि किस किस कारणों से आपको मोतियाबिंद हो सकता है और इसका इलाज कैसे कराएं।

Cataract Meaning in Hindi – मोतियाबिंद हिन्दी में

कैटरैक्ट को हिन्दी में मोतियाबिंद या मोतिया के नाम से जाना जाता है जो आँखों से सम्बंधित बहुत ही आम समस्या है। मोतियाबिंद में आँखों के लेंसों पर एक प्रकार का धुंधलापन सा छा जाता है। मोतियाबिंद तब होता है जब आपकी आंखों में प्रोटीन के क्लम्प बनने लगते हैं और जो आँखों के लेंस को कोई भी इमेज रेटिना तक पहुंचने या भेजने से रोकते हैं। हमारा रेटिना लेंसों से आने वाली रौशनी को सिग्नल्स में बदलता है और, यह ऑप्टिक नर्व को सिग्नल भेजता है जो उन्हें हमारे मस्तिष्क में ले जाता है और हम आसानी से उस वस्तु की पहचान कर पाते हैं।

मोतियाबिंद धीरे धीरे विकसित होता है और हमारी दृष्टि या देखने की शक्ति को बाधित करता है। मोतियाबिंद आपकी एक आँख या दोनों आँखों को भी प्रभावित कर सकता है पर जरूरी नहीं है कि यह दोनों आँखों में एक ही समय पर हो या एक जैसा प्रभाव छोड़े। जैसा की हम पहले ही बता चुके हैं की यह 50- 60 साल की आयु वाले लोग या इससे अधिक आयु वाले लोगों को अधिक होता है। हमारे देश में ही नहीं बल्कि संसार भर के लोग इस बीमारी के शिकार आसानी से हो जाते हैं। नेशनल आई इंस्टीट्यूट के मुताबिक, संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में लगभग आधे से अधिक लोगों को मोतियाबिंद हैं या 80 साल की उम्र तक उन लोगों ने मोतियाबिंद के लिए सर्जरी कराई है।

मोतियाबिंद के प्रकार

मोतियाबिंद अक्सर उम्र बढ़ने के साथ होता है पर ऐसा हमेशा हो यह जरूरी नहीं है। यह आपके जन्म के समय से, चोट लगने के कारण या किसी अन्य हेल्थ प्रॉब्लम की वजह से भी हो सकता है। अगर मोतियाबिंद के प्रकारों की बात की जाये तो यह कई प्रकार का हो सकता है, मोतियाबिंद का प्रकार काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है की यह किस प्रकार और कितनी तेज़ी से विकसित हो रहा है। मोतियाबिंद कई अलग-अलग प्रकार का हो सकता हैं, लेकिन उन सभी में एक बात आम है: आँखों के लेंसों पर धुंधलाहट छा जाना जिसके कारण स्पष्ट दिखाई देने में परेशानी होती है। जैसे जैसे मोतियाबिंद (Cataract in Hindi) विकसित होता जाता है वैसे वैसे दिखाई देने में परेशानी बढ़ती जाती है। इसके विकसित होने के अनुसार मोतियाबिंद के कुछ प्रकार नीचे दिए गए हैं-

  1. न्यूक्लिअर कैटरेक्ट: न्यूक्लियर मोतियाबिंद लेंस के बीच में विकसित होता हैं और नाभिक/न्यूक्लियस, या केंद्र को पीले या भूरे रंग का बना देता है। इस प्रकार का मोतियाबिंद को न्यूक्लियर स्क्लेरोटिक मोतियाबिंद भी कहा जाता है, जो डॉक्टरों द्वारा सबसे अधिक देखा जाता है।
  2. कॉर्टिकल कैटरेक्ट: कॉर्टिकल मोतियाबिंद कील के आकार का होता हैं और नाभिक के किनारों के चारों ओर होता हैं, जिसे कोर्टेक्स कहते हैं। यदि आपको इस तरह का मोतियाबिंद हैं, तो रात में ड्राइव करना आपके लिए मुश्किल हो सकता है। बहुत बार आपको समान रंगों को पहचानना या यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि कोई ऑब्जेक्ट कितना दूर है।
  3. पोस्टीरियर कैप्सुलर कैटरेक्ट: पोस्टीरियर कैप्सुलर कैटरेक्ट बाकि दोनों प्रकारो की तुलना में काफी तेज़ी से होता है और लेंस के पीछे वाले हिस्से को प्रभावित करता है। लेंस के पीछे से, जिस स्थान से रौशनी लेंस तक पहुँचती है यह वहाँ होता है। यह प्रकार आपकी क्लोज-अप दृष्टि को प्रभावित करता हैं और अधिक प्रकाश में देख पाना कठिन बनाता हैं।
  4. कन्जेन्सिअल कैटरेक्ट: इस प्रकार का मोतियाबिंद, बच्चे के जन्म के समय से होता है या जन्म के पहले वर्ष में विकसित होता है, इस प्रकार का मोतियाबिंद बहुत ही कम देखने को मिलता है। इस तरह के मोतियाबिंद होने का कारण आपके जीन्स से जुड़ा होता है या एक प्रकार की बीमारी जिसे रूबेला (मां को गर्भावस्था के दौरान होती है) नाम से जाना जाता है, उसके कारण होता है।
  5. सेकेंडरी कैटरेक्ट: जब किसी अन्य बीमारी के कारण मोतियाबिंद  होता है तो उसे सेकेंडरी कैटरेक्ट या माध्यमिक मोतियाबिंद कहते हैं। इस प्रकार का मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और डायबिटीज की वजह से हो सकता है। इसके अलावा स्टेरॉयड प्रेड्निसोने और अन्य किसी दवाई के कारण भी मोतियाबिंद हो सकता है।
  6. ट्रॉमेटिक कैटरेक्ट: कई प्रकार की चोटें इस तरह के मोतियाबिंद का कारण बन सकती हैं। यदि आपकी आँख किसी गेंद से हिट हो जाती है, जल जाती है, किसी रासायन या स्प्लिंटर की वजह से चोट लग जाती हैं तो आपको इस तरह का मोतियाबिंद हो सकता है।
  7. रेडिएशन कैटरेक्ट: आपको शायद पता न हो पर अपनी आँखों को भी सूर्य की पराबैंगनी (UV rays ) किरणों से बचना चाहिए। बहुत बार अगर आप बिना किसी सुरक्षा के तेज़ धूप में समय बिताते हैं तो भी आप मोतियाबिंद के शिकार हो सकते हैं। इसके अलावा किसी व्यक्ति के कैंसर के विकिरण उपचार से गुजरने के बाद रेडिएशन मोतियाबिंद हो सकता हैं।

भारत में मोतियाबिंद

भारत में मोतियाबिंद को बाइलेट्रल अन्धता का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। भारत की करीबन 63% आबादी मोतियाबिंद की शिकार हो चुकी है। 1980 में कैटरैक्ट सर्जरी का आंकड़ा करीबन 1.8 करोड़ था जो 2003 में बढ़कर करीबन 3.8 करोड़ हो चुका था। वर्ष 2017 की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग 0.8 करोड़ लोग अंधे हैं और 5.4 करोड़ दृष्टिहीन हैं। जिनमे से 80-90% अन्धता को टाला जा सकता है और इसका 90% से अधिक 50 साल से अधिक आयु के लोगों में देखने को मिलता है।

मोतियाबिंद होने के कारण

जब आपकी आँखों के लेंस पर प्रोटीन के क्लम्प बन जाते हैं और इसकी वजह से सब कुछ धुँधला दिखाई देने लगता है तो आपकी आँखों में मोतियाबिंद विकसित होता है। यह रौशनी को स्पष्ट रूप से गुजरने से रोकता है। ज्यादातर कंडीशंस में यह आपको अपनी कुछ दृष्टि खोने का कारण बन सकता है। मोतियाबिंद के कई अंतर्निहित कारण हैं, इसमें शामिल है:

कुछ अन्य चीजें जो मोतियाबिंद की संभावनाओं को बढ़ा सकती हैं उनमें सिगरेट का धुआं, वायु प्रदूषण, और बहुत अधिक शराब पीना शामिल हैं।

मोतियाबिंद के लक्षण

अगर उम्र के साथ आपको कम दिखाई देने लगा है तो इसे हल्के में न लीजिये। आपकी दृष्टि का धुंधला पड़ जाना आपके मोतियाबिंद का शिकार होने का संकेत हो सकता है। मोतियाबिंद या कैटरेक्ट दर्दनाक नहीं होते और न ही इसके कोई विशेष प्रकार के लक्षण होते हैं। मोतियाबिंद का एहसास आपको तब होता है जव आपकी दृष्टि धुंधली पड़ने लगती है या कोई वस्तु जैसी दिखाई देनी चाहिए वैसी नहीं दिखती। इसके कुछ मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं-

  • रात में कम दिखाई देना
  • रोशनी के प्रति संवेदनशीलता
  • लाइट के आस पास रौशनी का धुंधला गोला दिखना
  • 2 वस्तुओं में ओवरलैपिंग दिखना (डबल दृष्टि)।
  • धुंधला या मंद दृष्टि होना
  • पढ़ने और अन्य गतिविधियों के लिए ज्यादा रोशनी की आवश्यकता पड़ना
  • अच्छे से रंगों की पहचान न कर पाना

मोतियाबिंद बढ़ाने वाले कारक

मोतियाबिंद बढ़ाने वाले कारकों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • बढ़ती उम्र
  • मधुमेह
  • सूरज की रोशनी में बिना सुरक्षा रहना
  • धूम्रपान
  • मोटापा
  • उच्च रक्त चाप/हाई ब्लड प्रेशर
  • आंख की कोई पुरानी चोट या सूजन
  • आंख की कोई पुरानी सर्जरी
  • कॉर्टिकोस्टेरॉयड दवाओं का लंबे समय तक उपयोग
  • शराब अत्यधिक मात्रा में पीना – Alcoholic Liver Disease Meaning in Hindi

मोतियाबिंद का निदान

मोतियाबिंद का टेस्ट करने के लिए और आपकी दृष्टि की जाँच करने के लिए आपका डॉक्टर आपकी आँखों का एक व्यापक टेस्ट करेगा। इसमें आपका डॉक्टर आपकी आंखों के दबाव को मापने के लिए अलग-अलग दूरी और टोनोमेट्री से आपकी दृष्टि की जांच करने के लिए एक चार्ट बनाएगा और फिर चेक करेगा।

सबसे आम टोनोमेट्री परीक्षण आपके कॉर्निया को फ़्लैट करने के लिए दर्द रहित, हवा के पफ का उपयोग करता है और आपके आंखों के दबाव का परीक्षण करता है। आपका डॉक्टर आपके आँख के प्यूपिल को बड़ा करने के लिए आपकी आंखों में दवाई की कुछ बूंद डालेगा। इससे आपकी आंख के पीछे ऑप्टिक नर्व और रेटिना को जांचना आसान हो जाता है और आराम से देखा जा सकता है की कोई चोट तो नहीं लगी हुई।

इसके अलावा मोतियाबिंद की जाँच करने के लिए आपका डॉक्टर आपकी रोशनी के प्रति संवेदनशीलता और रंग पहचानने की शक्ति को जाँचेगा।

मोतियाबिंद का इलाज

यदि आप सर्जरी नहीं करना चाहते, तो आपका डॉक्टर आपके लक्षणों को रोकने में आपकी सहायता कर सकता है। वे एंटी-ग्लैयर कोटिंग के साथ मजबूत चश्मा, आवर्धक या मैग्नीफाइंग लेंस, या धूप का चश्मा पहनने के सलाह दे सकता है।

यदि आपको पढ़ने में परेशानी होती है तो आप और भी रोशनी देने वाली लाइट का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आपको ज्यादा चमक से परेशानी होती है तो उसके लिए आप एंटी ग्लेयर ग्लास का इस्तेमाल कर सकते हैं जो आपको रत में ड्राइविंग करने में भी सहायता करेगा।

जब आपकी दृष्टि की परेशानी आपके दैनिक दिनचर्या के रास्ते में आने लगे – खासकर यदि आप ड्राइविंग करतें है – तो समय है कि सर्जरी के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें। जानिए Cataract Surgery Cost in Delhi NCR में और कराएं अपनी कैटरेक्ट या मोतियाबिंद की सर्जरी।

मोतियाबिंद के लिए सर्जरी

जब आपको दैनिक गतिविधियों, जैसे पढ़ने या ड्राइविंग करने में बहुत परेशानी होती है तब सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है। यह तब भी किया जाता है जब मोतियाबिंद अन्य आंखों की समस्याओं के इलाज में हस्तक्षेप करते हैं।

फैकोमल्सिफिकेशन सर्जरी: फैकोमल्सिफिकेशन में लेंस को अलग करने और टुकड़ों को हटाने के लिए अल्ट्रासाउंड वेव्स का उपयोग किया जाता है।

एक्स्ट्राकैप्सुलर सर्जरी: इस प्रकार की सर्जरी में कॉर्निया में एक लम्बे चीरे के माध्यम से लेंस के धुँधले हिस्से को हटाया जाता है। सर्जरी के बाद, एक कृत्रिम इंट्राओकुलर लेंस रखा जाता है जहां प्राकृतिक लेंस था।

मोतियाबिंद को हटाने के लिए सर्जरी आमतौर पर बहुत सुरक्षित होती है और इसकी उच्च सफलता दर होती है। ज्यादातर लोग अपनी सर्जरी कराकर उसी दिन घर जा सकते हैं।

इसके बारे में भी विस्तार से पढ़ें: Eye Flu in Hindi और Glaucoma in HIndi

मोतियाबिंद (Cataract in Hindi) दैनिक गतिविधियों में हस्तक्षेप कर सकता है और इलाज न किए जाने पर अंधापन का कारण बन सकता है। हालांकि कुछ तरह के मोतियाबिंद (Cataract Meaning in Hindi) बढ़ने से रूक जाते हैं, पर वे अपने आप कम नहीं होते हैं। नेशनल आई इंस्टीट्यूट के मुताबिक, मोतियाबिंद का सर्जिकल इलाज उसको हटाने के लिए एक बहुत ही आम प्रक्रिया है और लगभग 90% प्रभावी है।

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