डॉ सुशीला कटारिया, Dr Sushila kataria. Dr Sushila Kataria medanta

14 कोरोना मरीजों का इलाज करने वाली डॉक्टर सुशीला कटारिया ने बताया वायरस से बचने का कारगर उपाय

जैसा की हम सभी  जानते हैं भारत में कोरोनावायरस संक्रमित व्यक्तियों की संख्या में तेजी से वृद्धि को देखते हुए सामाजिक दूरी और स्वच्छता बनाए रखने की बहुत आवश्यकता है। इस मुश्किल समय में हमारे डॉक्टर और अस्पताल इस वायरस को और मरीजों को कैसे संभाल रहे हैं, और इस परीक्षा की कठिन घड़ी में हमें क्या करना चाहिए और क्या सावधानियाँ बरतनी चाहिए, इस सभी के बारे में जानने के लिए, हमने मेदान्ता हॉस्पिटल, गुडगाँव की डॉ. सुशीला कटारिया, जो इंटरनल मेडिसिन विभाग की वरिष्ठ निदेशक हैं, से कोरोना वायरस (Coronavirus in Hindi) महामारी के विषय में कुछ सवाल किये। 

यहाँ हम आपको ये बताना चाहेंगे कि डॉ सुशीला कटारिया और उनकी टीम ने मिलकर कोरोना वायरस से पीड़ित 14 इटेलियन मरीजों का सफलतापूवर्क इलाज किया है, ये मामले देश में शुरूआत में आये कुछ मामलों में से हैं। 

आइये जानते हैं कोरोना वायरस के इलाज पर क्या बोली डॉ सुशीला कटारिया:

प्रश्न: कोरोना वायरस से पीड़ित 14 इटेलियन मरीजों के इलाज के लिए आपने क्या तैयारी की? 

उत्तर: इस पर डॉ सुशीला ने जवाब दिया, “4 मार्च को, पीएमओ ने डॉ नरेश त्रेहान से मेदांता में चौदह इटेलियन कोरोनोवायरस रोगियों को भर्ती करने का अनुरोध किया, और डॉ त्रेहान ने हमारी टीम से इस विषय में बात की, हम सभी ने इस समस्या को एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया। शुरूात में हमने अस्पताल के भीतर की सभी तैयारियों को पूरा करने का सोचा, लेकिन परिस्थितियाँ ऐसी थी कि हमें इस प्रक्रिया को जल्दी से जल्दी शुरू करना था। साथ ही हमे यह भी ध्यान रखना था की इन कोरोना मरीजों के कारण हमारे हॉस्पिटल के अन्य मरीज संक्रमित न हो जायें। सौभाग्य से, हमारे पास एक मंजिल खाली थी और हाल ही में पुनर्निर्मित की गई थी। करीब ५ घंटे में हमे इस मंजिल को आइसोलेशन रूम की तरह तैयार करना था।

हमारे पास समय बहुत ही कम था और इसी दौरान हमें सभी प्रोटोकॉल बनाने थे और साथ ही सभी की सुरक्षा का भी ध्यान रखना था। हमारी टीम की सहायता से हम इसमें कामयाब रहे, और जल्दी ही स्वच्छ और संक्रमित क्षेत्रों की पहचान की गई, और इस कार्य को करने वाले सभी डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों को कमरे उपलब्ध कराए गए। ”

देखिये डॉ सुशीला कटारिया, इंटरनल मेडिसिन विभाग की वरिष्ठ निदेशक, मेदांता हॉस्पिटल गुडगाँव, ने कोरोना वायरस के लक्षणों, कारण और रोकथाम के लिए क्या सुझाव दिए

प्रश्न: आपने किस प्रकार इतने कम समय में समस्त प्रोटोकॉल बनाये और कैसे आपने इस सबका प्रबंधन किया?

उत्तर: इस प्रश्न के उत्तर पर डॉ कटारिया ने बताया – “हमने सबसे पहले उपचार प्रोटोकॉल बनाने पर काम किया क्योंकि सब कुछ नया था। इस प्रकार का कोई मामला इससे पहले हमारे हॉस्पिटल में नहीं आया था। दरअसल कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण दिखने में कुछ समय लगता है, और लक्षण दिखने के दो से तीन दिनों के भीतर, इसके लक्षण गंभीर होने लगते हैं। इटेलियन मरीजों के साथ भी ऐसा ही हुआ। लक्षण दिखने के २-३ दिन में ही उनके लक्षण गंभीर होने लगे। इसके बाद हमने आइसोलेशन वार्ड में आईसीयू इकाइयाँ बनाईं और फिर मरीजों पर नज़र रखने के लिए टेलीमेडिसिन मॉनिटर कार्ट लगाए। 

क्योंकि ये सभी मरीज इटली निवासी थे इसलिए उनके परिजनों को सूचित करना भी आवश्यक था। मैंने उनके दूतावास और उनके परिजनों से संपर्क किया और उन्हें सारे घटनाक्रम के बारे में बताया। इलाज के बाद धीरे-धीरे उनमें से अधिकांश की तबियत में सुधार हुआ, और अब उनमें से 13 स्वस्थ हैं और घर वापस जा चुके हैं।

प्रश्न: डॉ, इस सभी के बीच में आपकी दिनचर्या में कितना बदलाव आया?

उत्तर: डॉ कटारिया ने अपनी दिनचर्या में बदलाव के विषय में बताते हुए कहा, “इस दौरान मेरी दिनचर्या बहुत बदल गई है। मैं सुबह 8 बजे तक अस्पताल में आ जाती थी। पूरे समय मैं अपने कमरे में कर्मचारियों से मिलने से बचती रहती थी, और जितना हो सकता था में उनसे उचित दूरी बनाए रखने की कोशिश करती थी।

हॉस्पिटल आने के बाद मैं सुरक्षात्मक सूट पहनती थी और आइसोलेशन वार्ड के अंदर जाकर कोरोना वायरस के रोगियों का ध्यान रखती थी, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान में उनके स्वास्थ्य की जाँच करना, नियमित जांच, उन्हें उनके परिजनों के विषय में बताना और उन्हें यह विश्वास दिलाने की कोशिश किया करती थी की वे लोग जल्द ही स्वस्थ हो जायेंगे। इस सभी में मुझे करीबन पांच घंटे के करीब लगता था। 

इस पूरे इलाज के दौरान मुझे दिन में लगभग चार बार स्नान करना पड़ता था, विशेष रूप से हर बार जब मैं आइसोलेशन वार्ड से बाहर आती थी। इस दौरान मैंने अपने रोगियों और कर्मचारियों के साथ मजबूत रिश्ते बनाये। जब भी वे लोग चिंतित या डरे हुए लगते थे, तो मैं उनसे बात करती थी और उनके सभी प्रश्नों का उत्तर देती थी। मैंने देखा कि जो रोगी अधिक बेचैन और चिंतित थे, वो अब महसूस करने लगे थे। लेकिन आखिरकार, वे बेहतर हो गए, और मैं इसके बारे में खुश हूं। ”

प्रश्न: कोरोना वायरस या कोविड-19 के संकेत, लक्षण और इसके संभव जोखिम क्या क्या हैं?

उत्तर: COVID-19 के संकेत और लक्षण, जोखिम कारकों के बारे डॉ कटारिया कहती हैं, “कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्तियों को गले में खराश, सूखी खाँसी और निम्न से मध्यम दर्जे का बुखार होता है। उनमें से अधिकांश समय के साथ बेहतर हो जाते हैं, लेकिन गंभीर मामलों में 7, 8, 9 और 10वे दिन तक मरीज के स्वस्थ्य में और गिरावट आने लगती है।

उन्हें सांस लेने में तकलीफ, लो ब्लड प्रेशर का अनुभव हो सकता है और वेंटीलेटर की आवश्यकता हो सकती है। आगे डॉ कटारिया कहती हैं, ” मेरी राय में, उम्र सबसे बड़ा कारक है, ऊपर से यदि आपको कोई अन्य बीमारी जैसे डायबिटीज इत्यादि है तो मरीज की हालत में सुधर होना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। मेरे रोगियों में, हाई ब्लडप्रेशर या हाई कोलेस्ट्रॉल जैसे जोखिम कारक नहीं थे। उनके अनुसार – ब्लडप्रेशर की दवाइयों ने मेरे रोगियों में इस बीमारी का इलाज करने में मदद की होगी।”

प्रश्न: पूरे इलाज के दौरान आपने किन किन चुनौतियों का सामना किया?

उत्तर: डॉ सुशीला ने चुनौतियों के बारे में बताते हुए कहा, “अस्पताल में, हमें सब कुछ शुरू से करना था, हर चीज के लिए प्रोटोकॉल बनाना था, आइसोलेशन यूनिट में आईसीयू बनाना, सीमित स्टाफ के साथ वेंटिलेटर पर 24×7 कोरोना मरीजों की निगरानी करना, जो काफी चुनौतीपूर्ण था। मैं पूरा समय अपने परिवार से दूर थी, घर पर भी मैं एक अलग बेडरूम और बाथरूम का उपयोग करती थी, और यहां तक कि भोजन भी अपने परिवार से अलग रहकर ही करती थी। लेकिन इस कठिन समय में मेरे बच्चे और पति बहुत सहायक रहे और उन्होंने बहुत ही समझदारी से काम लिया और मेरा पूरा सहयोग दिया। ”

प्रश्न: आप कोरोना वायरस के लिए नैदानिक टेस्ट्स और क्वारंटाइन के बारे में क्या कहना चाहेंगी?

उत्तर: इस पर, वह कहती हैं, “कोई भी लैब बिना डॉक्टर के पर्चे के कोरोना वायरस का परीक्षण नहीं करती है। यदि आपके अंदर कोरोना वायरस के कोई लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसके लिए पहले डॉ को दिखाना होगा, और केवल डॉक्टर द्वारा परीक्षण का आदेश दिए जाने के बाद ही आप परीक्षण करवा सकते हैं। इसके अलावा, यह समझना महत्वपूर्ण है कि यदि आप सभी सावधानियों का पालन कर रहे हैं, तो आपको इन्फेक्शन होने की संभावना नहीं है। कोशिश करें कि आप बिना किसी काम के अपने घरों से बाहर न निकले।”

और यदि आप बाहर यानि किसी देश से वापस आयें हैं और आपके भीतर कोरोना वायरस का कोई लक्षण नहीं है तो सावधानी के रूप में क्वारंटाइन का पालन करें और अपने परिजनों से उचित दूरी बनाये रखें।

इसके अलावा होम क्वारंटाइन या संगरोध कॉरोनोवायरस रोग के संदिग्ध लोगों के लिए है, खासकर यदि वे एक संक्रमित रोगी के संपर्क में आए हैं, या संक्रमित देशों में से किसी देश से यात्रा कर के आये हैं। यदि व्यक्ति कोई लक्षण दिखा रहा है लेकिन उसका टेस्ट नकारात्मक आया है, तो उन्हें कम से कम दो सप्ताह के लिए क्वारंटाइन में रहना होगा। वे अपने घरों को नहीं छोड़ सकते हैं और घर में सभी सदस्यों से कम से कम एक मीटर की दूरी बनाए रखना होगा। 

सबसे अच्छा होगा अगर वे एक अलग बेडरूम और बाथरूम का उपयोग करते हैं। दरवाजों के हैंडल को नियमित रूप से साफ किया जाना चाहिए, और संदिग्ध व्यक्ति के कपड़े और बर्तन को अलग से धोया जाना चाहिए। ”

इसे इंग्लिश में भी पढ़ें: होम क्वारंटाइन के दौरान अपने डॉक्टर से टेली/वीडियो परामर्श लें

प्रश्न: कोरोना वायरस से बचने के लिए आप क्या सलाह देना चाहेंगी?

उत्तर: इस पर डॉ कटारिया कहती हैं, ” इस बीमारी से बचने का सबसे अच्छा उपाय है आप निम्न सावधानियों को अपने दैनिक जीवन में धारण करें-

  • समय समय पर अपने हाथ साबुन और साफ पानी से धोते रहें
  • साबुन को कम से कम २० सेकण्ड तक अपने हाथ में रखें 
  • यदि पानी न हो तो सेनेटाइजर का उपयोग करें
  • इम्युनिटी बढ़ाने वाले भोजन का सेवन करें 
  • इसके अलावा सामाजिक दूरी का पालन करें 
  • बिना बात के घर से बाहर न निकलें 
  • घबरायें नहीं, घर पर रहें और शांत रहें। 

लोग बीमारी के डर से और अधिक चिंतित हैं परेशान हैं। इस कठिन समय का हम सभी को डट कर सामना करना होगा।

स्वस्थ रहें सुरक्षित रहें।

इसे इंग्लिश में भी पढ़ें: Staying Calm & At Home Are Key Asserts To Fight Coronavirus Advise By Dr Sushila Kataria, Medanta Hospital

डॉ सुशीला कटारिया

Dr sushila kataria

डॉ सुशीला कटारिया मेदांता हॉस्पिटल, गुड़गांव में इंटरनल मेडिसिन विभाग की वरिष्ठ निदेशक हैं। इन्हें इस क्षेत्र में 19 वर्षों का अनुभव है।

इन्होंने 1997 में पंडित भागवत दयाल शर्मा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज रोहतक से एमबीबीएस, 2001 में एमडी और 2004 में सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज से पीजीडीएमएलएस किया।

 

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