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फंगल इन्फेक्शन दूर करने के उपाय – Fungal Infection in Hindi

यदि आपको कभी एथलीट फुट या यीस्ट इन्फेक्शन हुआ है, तो आपको फंगल इन्फेक्शन के बारे में अवश्य पता होगा, क्योंकि ये इन्फेक्शन फंगल इन्फेक्शन के ही प्रकार होते हैं। हमारे आस पास के वातावरण में बहुत प्रकार के कवक रहते हैं उनमे से कुछ हमारे शरीर पर भी बिना नुकसान पहुंचाए रहते हैं, मशरूम, मोल्ड और फफूंदी इसके ही उदाहरण हैं। कवक हवा में, मिट्टी में, पौधों पर और पानी हर जगह रहते हैं। कुछ मानव शरीर में रहते हैं। यदि बात की जाये कि कवक या फंगस हानिकारक होती है या नहीं, तो यहां हम आपको ये बता दें कि -सभी प्रकार के कवक के लगभग आधे हानिकारक होते हैं। कुछ छोटे छोटे फंगस/कवक हवा में छोटे बीजाणुओं के माध्यम से प्रजनन करते हैं, ये ही छोटे बीजाणु बहुत बार हमारे द्वारा ली गयी हवा के माध्यम से हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और हमे इन्फेक्टेड कर देते हैं। यदि आपका इम्यून सिस्टम कमजोर है या आप एंटीबायोटिक्स लेते हैं तो आपको फंगल इन्फेक्शन होने की अधिक संभावना है। आइये जानते हैं Fungal Infection in Hindi और इसका Fungal Infection Treatment in Hindi or Fungal Infection on skin Treatment in Hindi।

फंगल इन्फेक्शन इन हिंदी – Fungal infection in Hindi

फंगल इन्फेक्शन (Fungal Infection in Hindi) काफी आम होता है। मनुष्यों में, फंगल इन्फेक्शन तब होता है जब फंगस आपके शरीर पर सीधे आक्रमण करती है अगर आपका इम्यून सिस्टम उतना मजबूत नहीं होता कि आपको उस इन्फेक्शन से बचा सके। यह एक ऐसा इन्फेक्शन होता है जो शरीर पर कई प्रकार के फंफूद या कवक के कारण हो जाता है, जिनमे डर्मेटोफाइट्स और यीस्ट प्रमुख होते हैं फंफूद मृत केराटिन में पनपता है और धीरे धीरे हमारे शरीर के ऐसे स्थानों में फ़ैल जाता है जहाँ थोड़ी नमी होती है जैसे कि – पैर की उँगलियों के बीच का हिस्सा, एड़ी, नाखून, जननांग, स्तन इत्यादि। फंगस को मारना मुश्किल हो सकता है।कई माइक्रोब्स की तरह, कुछ फंगस हमारे शरीर के लिए सहायक होते हैं और कुछ हानिकारक होते हैं। जब हानिकारक फंगस हमारे शरीर पर आक्रमण करते हैं, तो उन्हें मारना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि वे पर्यावरण में जीवित रह सकते हैं और उस व्यक्ति को फिर से इन्फेक्टेड कर सकते हैं। त्वचा और नाखून में इन्फेक्शन के लिए, आप सीधे इन्फेक्टेड जगह पर दवा लगा सकते हैं। गंभीर इन्फेक्शन के लिए ओरल ऐंटिफंगल दवाएं भी उपलब्ध हैं। “आइये जानते हैं फंगल इन्फेक्शन के लक्षण (Symptoms of Fungal Infection in Hindi) और कारण (Causes of Fungal Infection in Hindi) क्या क्या हो सकते हैं –

फंगल इन्फेक्शन के कारण – Causes of Fungal Infection in Hindi

  • शारीरिक केमिस्ट्री और जीवन शैली फंगल इन्फेक्शन के जोखिम को बढ़ा सकती है। उदाहरण के लिए, यदि आप एक धावक (एथलीट) हैं या यदि आपको बहुत पसीना आता है तो आप एथलीट फुट (Athlete’s Foot Meaning) नामक फंगल इन्फेक्शन (Fungal Infection in Hindi) के कई लक्षणों का अनुभव कर सकते हैं।
  • फंगस अक्सर गर्म, और नम वातावरण में बढ़ती है।
  • पसीने से तर या गीले कपड़े पहनना भी आपकी त्वचा के इन्फेक्शन के लिए एक जोखिम कारक है।
  • त्वचा के कटने या फटने से भी बैक्टीरिया त्वचा की गहरी परतों में अंदर तक जा सकता है और विभिन्न प्रकार के इन्फेक्शन हो सकते हैं।
  • व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ गैर-अनुपालन
  • अत्यधिक पसीना आना
  • तंग कपड़े, जूते पहनने से
  • एंटीबायोटिक्स लेना
  • कमजोर इम्यून सिस्टम

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फंगल इन्फेक्शन के लक्षण – Symptoms Of Fungal Infection in Hindi

वैसे तो फंगल इन्फेक्शन के लक्षण (Symptoms of Fungal Infection in Hindi) इसके प्रकार पर निर्भर करते हैं, लेकिन कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:

  • त्वचा में परिवर्तन, जिसमें लाल और संभवतः त्वचा का काटना या छिलना शामिल है
  • खुजली होना (Khujli Ke Upay)

कुछ सामान्य प्रकार के फंगल इन्फेक्शन, उनके लक्षण और उपचार के विकल्पों के बारे में अधिक जानने के लिए नीचे पढ़ें।

फंगल इन्फेक्शन के प्रकार – Types of Fungal Infection in Hindi

यहां कुछ अधिक सामान्य फंगल और यीस्ट इन्फेक्शन दिए गए हैं जो लोग अनुभव करते हैं-

टीनिया वर्सीकोलर

टीनिया वर्सीकोलर को पिएट्रिासिस वर्सिकोलर के रूप में भी जाना जाता है। यह त्वचा की सबसे ऊपर की परत, एपिडर्मिस में होने वाला एक फंगल इन्फेक्शन है। यीटीनिया वर्सीकोलरस्ट जो इस तरह के इन्फेक्शन के लिए जिम्मेदार होता है वह अक्सर तेलीय त्वचा में बहुत अधिक होता है जिस कारण इस प्रकार का इन्फेक्शन वृद्धों की तुलना में व्यस्को को ज्यादा होता है। टीनिया वर्सीकोलर के लिए उपचार उपलब्ध है, लेकिन यह इन्फेक्शन अक्सर वापस आ जाता है। परन्तु, यह इन्फेक्शन किसी भी प्रकार के दर्द या खुजली का कारण नहीं बनता है।

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इलाज

यदि आपके लक्षण गंभीर नहीं हैं, तो आप घर पर भी इस फंगल इन्फेक्शन का इलाज (Fungal infection treatment in hindi) कर सकते हैं। इस इन्फेक्शन के इलाज के लिए ओटीसी एंटिफंगल क्रीम या शैंपू का प्रयोग करना प्रभावी हो सकता हैं। यदि आप टीनिया वर्सीकोलर के लिए मेडिकल इलाज करना चाहते हैं, तो आपका डॉक्टर विभिन्न दवाओं को लिख सकता है, जैसे कि टोपिकल क्रीम जिसे सीधे त्वचा पर लगाया जा सकता है।

जोक इच (दाद का एक प्रकार)

जोक इच, जिसे टिनिया क्रूसिस के नाम में भी जाना जाता है, यह मुख्यतः ग्रोइन(पेट और जांध के बीच का भाग) की त्वचा में होने वाला एक फंगल इन्फेक्शन है। जैसा कि हमने बताया कि फंगस गर्म, नम वातावरण में पनपता है – और ग्रोइन के आस-पास नमी रहती है। जोक इच आमतौर पर महिलाओं को अधिक होती है, जबकि पुरुषों में यह इन्फेक्शन न के बराबर होता है। जैसा कि इस इन्फेक्शन (Fungal Infection in Hindi) के नाम से पता चलता है, इसमें बहुत अधिक खुजली होना इसका मुख्य लक्षण होता है।

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इलाज

यह आमतौर पर ओवर-द-काउंटर फंगल इन्फेक्शन क्रीम से जल्दी सही हो जाता है। जोक इच को रोकने के लिए ग्रोइन को जहां तक हो सके सूखा रखना चाहिए और कभी-कभी हर दिन एंटिफंगल पाउडर का उपयोग करते रहना चाहिए। यदि एंटीफंगल क्रीम से एक-दो सप्ताह में इन्फेक्शन सही नहीं होता है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

एथलीट फुट

एथलीट फुट, या टीनिया पेडिस, पैरों में होने वाला एक सामान्य फंगल इन्फेक्शन है। चूंकि यह इन्फेक्शन एथलीट/ धावकों में बहुत ही आम होता है इस कारण इसे एथलीट फुट कहा जाता है। एथलीट फुट में पैर की उंगलियों के बीच में इन्फेक्शन हो जाता है। यह इन्फेक्शन तीव्र खुजली का कारण बनता है और त्वचा को तोड़ देता है, इसलिए यह अक्सर पैर की उंगलियों के बीच सफेद फंफूद की तरह दिखता है।

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इलाज

एथलीट फुट में एथलीट के पैर का इलाज (Fungal Infection Treatment in Hindi) आमतौर पर क्रीम या लोशन लगाकर किया जाता है, लेकिन कभी-कभी गंभीर मामलों में ओरल ऐंटिफंगल दवा की आवश्यकता होती है।इसके अलावा आप हाइड्रोजन परॉक्साइड का भी उपयोग कर सकते हैं, यह पैर की त्वचा से फंगस को जड़ से समाप्त कर देता है।

दाद या रिंगवॉर्म

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दाद, जिसे टिनिया कॉर्पोरिस भी कहा जाता है, त्वचा का एक सामान्य प्रकार का फंगल इन्फेक्शन होता है। ऐसी कई फंगस होती हैं जो दाद का कारण बन सकते हैं और वे एपिडर्मिस में रहते हैं। दाद टीनिया वर्सीकोलर की तुलना में अधिक लक्षणों का कारण बनता है, जैसे खुजली और ध्यान देने योग्य लाल चकत्ते। चकत्ते अक्सर पपड़ीदार, लाल पैच और उभरे हुए चकते होते हैं जो धीरे-धीरे बढ़ते जाते हैं। इनका आकार ही इनके निदान का कारण बनाता है।

इलाज

रिंगवॉर्म या दाद को टोपिकल ऐंटिफंगल दवा के साथ बहुत आसानी से इलाज (Fungal Infection Treatment in Hindi) किया जाता है। ज्यादातर मामलों में, आपको यह सुनिश्चित करने के लिए फंगल इन्फेक्शन समाप्त हो गया है या नहीं, करीबन 2 से 4 सप्ताह के लिए अपनी त्वचा पर इन दवाओं का उपयोग करना चाहिए। इससे दाद के वापस आने की संभावना भी कम हो जाएगी।

स्कैल्प का दाद

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स्कैल्प के दाद को टीनिया कैपिटिस के नाम से भी जाना जाता है और यह, दाद से भी अधिक तीव्र फंगल इन्फेक्शन है जो त्वचा के अन्य क्षेत्रों पर भी दिखाई देता है। इस दाद का कारण बनने वाली फंगी न केवल खोपड़ी की त्वचा को संक्रमित करती है, बल्कि बालों के रोम में भी फ़ैल जाती हैं। जिस कारण यह बालों के गिरने का कारण भी बन सकता है, और उस स्थान से बाल उड जाते हैं और वहाँ दाद के प्रकार के दाने के साथ एक गंजा स्थान छोड़ देता है।

इलाज

टिनिया कैपिटिस का इलाज (Fungal infection treatment in hindi) टोपिकल क्रीम से नहीं किया जा सकता है। इसका इलाज ओरल ऐंटिफंगल दवाओं से करना पड़ता है। मुंह से ली जाने वाली एंटिफंगल दवाएं स्कैल्प के दाद का इलाज (Fungal infection on skin treatment in hindi) करने के लिए उपयोग की जाती हैं। आमतौर पर इसके लिए इस्तेमाल की जानी वाली दवाओं में ग्रिसोफुलविन (ग्रिस-पेग) और टेरबिनाफिन (लैमिसिल) शामिल हैं। आपके बच्चे को इन दवाओं में से एक को छह सप्ताह या उससे अधिक समय तक लेने की आवश्यकता हो सकती है।

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नाखून में फंगल इन्फेक्शन

इस प्रकार का नफ़ेक्शन नाखूनों में होता है जिसे ऑनिकोमाईकोसिस भी कहा जाता है, पैर की अंगुली के नाखून के हिस्से में फंगल इन्फेक्शन के कारण होता है।जैसे-जैसे नाखून बढ़ता है, यह भंगुर होता जाता है, फिर मोटा होकर नाखून से अलग हो जाता है।

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इलाज

फंगल नेल के इलाज (Fungal Infection Treatment in Hindi) के लिए भी ओरल ऐंटिफंगल दवाओं का प्रयोग किया जाता है। इसके इलाज (Fungal Infection on Skin Treatment in Hindi) के लिए भी क्रीम और लोशन मदद नहीं करते।

फंगल स्किन इन्फेक्शन का इलाज – Fungal Infection On Skin Treatment in Hindi

फंगल इन्फेक्शन (Fungal Infection in Hindi) को मारने और जल्दी से ठीक होने में आपकी सहायता के लिए कई उपचार (Fungal Infection Treatment in Hindi) उपलब्ध हैं। आपके द्वारा प्राप्त किया जाने वाला उपचार (Fungal Infection on Skin Treatment in Hindi) उस प्रकार और फंगलस्किन इन्फेक्शन की गंभीरता पर निर्भर करता है जिससे आप पीड़ित हैं। उदाहरण के लिए, टिनिआ कैपिटिस को हर दो या तीन दिनों में लगाने के लिए मेडिकेटेड शैम्पू की आवश्यकता हो सकती है, जबकि शरीर पर कहीं भी दाद होने पर प्रत्येक दिन कई बार एक सामयिक क्रीम लगाने की आवश्यकता हो सकती है।

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अधिकांश फंगल स्किन इन्फेक्शन का इलाज (Fungal Infection on Skin Treatment in Hindi) ओवर-द-काउंटर या प्रिस्क्रिप्शन क्रीम के साथ किया जा सकता है। यदि आप गंभीर इन्फेक्शन (Fungal Infection in Hindi) से पीड़ित हैं तो इसके लिए अतिरिक्त तरीकों की आवश्यकता हो सकती है।सावधानी बरतना फंगल स्किन इन्फेक्शन से बचने का सबसे अच्छा उपाय है। संभवतः गंभीर जटिलताओं से बचने के लिए स्किन इन्फेक्शन के शुरूआती लक्षणों के लिए डॉक्टर को सूचित करना सबसे अच्छा विकल्प है। डॉक्टर की सहायता से, फंगल स्किन इन्फेक्शन के अधिकांश मामलों का आसानी से इलाज (Fungal Infection Treatment in Hindi) किया जा सकता है।