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Malaria Ke Lakshan – मलेरिया के लक्षण, कारण और इलाज

मलेरिया जुलाई से नवम्बर के बीच फैलने वाला रोग है जो प्लाज्मोडियम नाम के पैरासाइट से फ़ैलता है। और इसका प्रमुख कारण है मादा एनाफिलीज मच्छर का काटना जो ज्यादातर गंदे पानी में पनपता है। Malaria ke lakshan (Malaria Symptom in Hindi)  सभी व्यक्तियों में एक जैसे नहीं होते।वर्ष 2000 से, भारत में मलेरिया के केस कम ही देखने को मिलते हैं फिर भी देश में कई ऐसे राज्य हैं जहाँ आज भी मलेरिया के केस आराम से मिल जायेंगे। ओडिशा के पूर्वी राज्य उन्ही में से एक हैं, मलेरिया के कुल केस में से 40% केस केवल ओडिशा के पूर्वी राज्य में मिल जाते हैं। अगर इंडिया की बात करें तो मलेरिया ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, त्रिपुरा और मेघालय जैसे देश के पूर्वी, मध्य और उत्तर-पूर्वी राज्यों के हिस्सों में सबसे ज्यादा फ़ैलता है। इनमें से ज्यादातर राज्य पहाड़ी, आदिवासी, जंगलों से भरे हुए हैं जहाँ मलेरिया आसानी से फ़ैल जाता है। हाल के वर्षों में, राज्य सरकार ने मलेरिया को रोकने, निदान करने और इलाज करने के लिये कई प्रयास किये हैं और अच्छी बात यह  इसके परिणाम काफी अच्छे रहें हैं। इंडिया ने 2027 तक मलेरिया मुक्त होने और 2030 तक इस बीमारी को समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। आइये इस बीमारी के कारणों लक्षणों (Malaria ke lakshan, Malaria symptoms in Hindi), इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं और टेस्ट्स के बारे में और जानते हैं।

मलेरिया कब और कैसे होता है?

मलेरिया एक वेक्टर जनित रोग है जो मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होता है। इसको फैलाने वाला मच्छर गंदे पानी में तेज़ी से पनपता है और केवल रात के समय ही काटता है अगर इसके पीक समय की बात करें तो बरसात के मौसम में इसके फ़ैलने की सम्भवना सबसे ज्यादा होती है और ऐसा होता भी है क्योंकि जुलाई महिने को इसका पीक समय मन जाता है और लगभग नबंवर महीने तक इसके केस सुनने को मिल ही जाते हैं। मलेरिया का मच्छर दिन छिपने के बाद काटता है, और अलग-अलग इंसान पर अलग-अलग असर करता है जैसे मलेरिया के कुछ रोगियों को ठण्ड के साथ तेज़ बुखार की शिकायत होती है वहीं किसी-किसी इंसान में इसके लक्षण एक साथ नहीं दिखाई देते। कभी कभी मलेरिया में बुखार नहीं आता और यह धीरे धीरे बढ़ता जाता है जिससे रोगी में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है और इसकी कमी से होने वाली बीमारी एनीमिक हो जाती है जो खतरनाक हो सकता है।

मलेरिया के लक्षण – Malaria ke Lakshan (Malaria Symptoms in Hindi)

जैसा की हम पहले ही बता चुके हैं कि Malaria ke Lakshan (Malaria Symptoms in Hindi) सभी व्यक्तियों में एक जैसे नहीं होते, कुछ मरीजों में इसके लक्षण (Malaria symptoms in HIndi) समय पर दिख जाते हैं वहीं कुछ लोगों को इसका पता तब चलता है जब यह भयानक रूप ले लेता है। मलेरिया के लक्षणों (Malaria ke Lakshan) को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है :

  1. अनकॉम्प्लिकेटिड मलेरिया
  2. कॉम्प्लिकेटिड मलेरिया or Severe Malaria
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अनकॉम्प्लिकेटिड मलेरिया के लक्षण – Uncomplicated Malaria ke Lakshan:

अनकॉम्प्लिकेटिड मलेरिया तब होता है जब इसके लक्षण (Malaria symptoms in Hindi) बहुत ज्यादा गंभीर नहीं होते, और न ही इस प्रकार का मलेरिया रोगी के शरीर के किसी महत्वपूर्ण अंग को प्रभावित करता है। अगर सही समय पर इसका इलाज न किया जाये तो इस प्रकार का मलेरिया कॉम्प्लिकेटेड मलेरिया में बदल सकता है। अनकॉम्प्लिकेटिड मलेरिया के लक्षण (Malaria Symptoms in Hindi) ज्यादातर 6 -10 घंटे  के लिए रहते हैं और हर दूसरे दिन रिपीट होते हैं, वहीं कुछ पैरासाइट्स के काटने पर यह साईकिल लम्बा भी चल सकता है। 

अनकॉम्प्लिकेटिड मलेरिया के लक्षण (Malaria Symptoms in HIndi) फ्लू की तरह ही होते हैं, इसलिए  जिन जगहों पर मलेरिया नहीं होता वो गलती करबैठते हैं और गलत इलाज करा लेते हैं। अनकॉम्प्लिकेटिड मलेरिया में पहले  ठंड लगती है, फिर गर्मी लगती है, और उसके बाद  पसीने आते हैं, इस तरह से यह फ़ैलता है, कुछ मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:

  • कंपकपी चढ़ना
  • बुखार, सिरदर्द, और उल्टी
  • दौरे पड़ना
  • पसीने के बाद, सामान्य तापमान पर लौटने के बाद पसीना    

कॉम्प्लिकेटिड मलेरिया के लक्षण – Complicated Malaria ke Lakshan:

कॉम्प्लिकेटिड मलेरिया के लक्षणों (Malaria Symptoms in Hindi)  को लैब टेस्ट्स की सहायता से पहचाना जा सकता है, वे इस प्रकार हैं

  • बुखार और ठंड
  • बेहोशी
  • गहरी सांस लेने और श्वसन में परेशानी होना
  • अबनॉर्मल रक्तस्राव और एनीमिया के लक्षण
  • पीलिया – Jaundice in Hindi
  • इलाज के बिना कॉम्प्लिकेटिड मलेरिया जानलेवा हो सकता है।

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मलेरिया का इलाज – Malaria ka Ilaj

मलेरिया के इलाज के लिये देखरेख के साथ साथ कुछ उपयुक्त एंटीबायोटिक दवाओं की भी जरूरत होती है। इसलिए यह बीमारी निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है:

  • पैरासाइट्स के अनुसार
  • लक्षणों की गंभीरता के आधार पर और
  • ड्रग रेसिस्टेंट के आधार पर और रोगी किस क्षेत्र में ट्रेवल कर रहा है उसके आधार पर
  • डॉक्टर उपरोक्त कारकों के आधार पर एंटीबायोटिक दवा या सलाह देगा।

मलेरिया के इलाज के लिए वेक्सिनेशन:

मलेरिया को रोकने के लिए अभी तक में कोई वैक्सीन नहीं है।प्लाज्मोडियम प्रजातियों की विविधता और पी फाल्सीपेरम प्रजातियां सबसे घातक परजीवी होने के कारण, वर्तमान में अधिकांश प्रयास पी फाल्सीपेरम वैक्सीन की ओर निर्देशित हैं। आरटीएस, एस / एएसओ 1 एक व्यवहार्य टीका के रूप में सबसे उन्नत उम्मीदवार है।

मलेरिया से बचाव:

कोई दवा 100% प्रभावी नहीं होती है, इसलिए मच्छर के काटने की रोकथाम सबसे महत्वपूर्ण है। इन निवारक उपायों में निम्नलिखित शामिल होना चाहिए:

  • मच्छरदानी में सोएं: मच्छरों से बचने के लिए ये जाल सबसे प्रभावी हैं अगर उन्हें कीटनाशक के साथ इश्तेमाल किया जाता है।
  • कपडे अच्छे से पहनें : कपड़ों में जो अधिकांश खुली त्वचा और जूते बंद होते हैं, रात के समय ऐसे कपड़े न पहनें। कपड़े जूते अच्छे से पहनें, इस तरीके से आप अपने आप को बचा सकते हैं।
  • खुली त्वचा पर कीटनाशक दवा का प्रयोग करें।

मलेरिया से बचने के लिए जरूरी है कि समय से इसके लक्षण (Malaria symptoms in Hindi) को पहचान लिया जाये और सही समय पर इसका इलाज कर लिया जाये। इलाज से भी जरूरी है की इससे बचाव किया जाये।

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